Saturday, August 28, 2010

3. उडल पिसान पितरं के नेति .....

उडल पिसान पितरं के नेति .....

विस्तार - जो आटा किसी कारणवश गिर गया या उड़ गया, उसको पितरों को समर्पित कर दिया.
पूर्वजों को लोग अपनी खुशी से अच्छा - अच्छा बना कर खिलाते है लेकिन लोग बेकार हुई चीजो को ही पितरो को समर्पित कर देते है.

अर्थात अगर कोई चीज बेकार चली गयी तो लोग मन के संतोष के लिए किसी नेक काम का सहारा ले लेते है

ये कुछ उसी प्रकार की बात है की जब मंदिर में हमारा चढ़ाया नारियल ख़राब निकल जाता है तो हम कहते है की इसे भगवान ने स्वीकार कर लिया है

ब्लॉग परिचय

ये ब्लॉग भोजपुरी कहावतों का एक संग्रह है जो की भोजपुरी में रोजमर्रा की बातचीत में प्रयुक्त होते रहे है. आज-कल इनमे से बहूत से मुहावरे लुप्त होते जा रहे है.
इस संग्रह में आये सभी उक्तियां और मुहावरे हमारी माताजी "श्रीमती प्रभावती देवी दुबे" के द्वारा सामान्य बातचीत में प्रयोग किये जाते है.

१. सेती के साग मौसिया के सराध

विस्तार - मुफ्त में सब्जी मिली तो मौसी का भी श्राद्ध कर दिया( जिसका श्राद्ध करना हालाँकि आपकी जिम्मेदारी नहीं थी), अर्थात मुफ्त में मिली चीज से वाहवाही लूटने के लिए वो सारे व्यव्हार भी चलने लगा जो की जरूरी नहीं है.

इस मुहावरे का उपयोग उन लोगो के लिए किया जाता है जिन्हें कोई अपना समझ कर कोई सुविधा या चीज देता है और वो उसी चीज को अपने नाम से और लोगो को देने लग जाता है